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23 साल बाद फिर पाकिस्तान पहुंचे ‘तारा सिंह’…लेकिन इस बार बदला अंदाज, जानिए क्यों हो रही ‘गदर’ से ‘Batwara 1947’ की तुलना

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Batwara 1947 Trailer: फिल्म ‘गदर: एक प्रेम कथा’ में सनी देओल के किरदार तारा सिंह अपनी पत्नी को वापस लाने के लिए पाकिस्तान पहुंचते हैं. वहां वह ढाई किलो के हाथ का जिक्र करते हैं, हैंड पंप उखाड़ते हैं, कई लोगो से लड़ाई करते हैं और काफी मुश्किलों का सामना करके फाइनली अपनी पत्नी को लेकर भारत लौट आते हैं. 23 साल बाद सनी देओल एक बार फिर पाकिस्तान जा रहे हैं, लेकिन इस बार कहानी काफी अलग है. इस बार वह एक हिन्दू महिला (शबाना आजमी) की रक्षा करते दिखाई देते हैं.  इस फिल्म में सनी देओल पाकिस्तान लड़ने के लिए नहीं, बल्कि वहां रहने के लिए जाते हैं.

फिल्म ‘बंटवारा 1947’ का ट्रेलर मंगलवार, 28 जुलाई को रिलीज हुआ. इस मौके पर सनी देओल, शबाना आजमी सहित कई अन्य सितारे नजर आए. फिल्म के डायरेक्टर राजकुमार संतोषी भी नजर आए. सबने अपने एक्सपीरियंस भी शेयर किया और फिल्म को लेकर राय रखीं. आइये जानते है इस फिल्म के अनोखे पहलुओं के बारे में:

Sunny Deol and Rajkumar Santoshi Reunion: 30 साल बाद साथ काम कर रहे सनी देओल और राजकुमार संतोषी: 

सनी देओल और मशहूर फिल्ममेकर राजकुमार संतोषी एक बार फिर साथ आए हैं. दोनों की जोड़ी करीब 30 साल बाद फिल्म ‘बंटवारा 1947’ के लिए साथ काम कर रही है. इससे पहले सनी देओल और राजकुमार संतोषी ने कई यादगार फिल्मों में साथ काम किया है, जिनमें ‘घायल’, ‘दामिनी’ और ‘घातक’ जैसी फिल्में शामिल हैं. इन फिल्मों ने न सिर्फ दर्शकों के बीच अपनी खास पहचान बनाई, बल्कि सनी देओल के करियर में भी अहम भूमिका निभाई.

सनी देओल और राजकुमार संतोषी की जोड़ी को दर्शकों ने हमेशा पसंद किया है और दोनों के साथ आने से एक बार फिर उनके प्रशंसकों के बीच उत्सुकता बढ़ गई है. अब ‘बंटवारा 1947’ के जरिए यह जोड़ी लंबे समय बाद बड़े पर्दे पर एक साथ वापसी कर रही है. फिल्म को लेकर दर्शकों के बीच काफी उम्मीदें हैं, क्योंकि सनी देओल की दमदार अदाकारी और राजकुमार संतोषी की कहानी कहने की खास शैली पहले भी कई बार दर्शकों का दिल जीत चुकी है.

Will This Duo Create the Same Magic: क्या धमाल मचा पायेगी यह जोड़ी

राजकुमार संतोषी और सनी देओल की जोड़ी ने ‘घायल’, ‘दामिनी’ और ‘घातक’ जैसी फिल्मों से भारतीय सिनेमा में एक नया इतिहास रचा था. अब करीब 30 साल बाद फिल्म ‘बंटवारा 1947’ के जरिए दोनों का फिर से साथ आना प्रशंसकों के लिए किसी सौगात से कम नहीं है. इन फिल्मों में सनी देओल के दमदार अभिनय और राजकुमार संतोषी के मजबूत निर्देशन का शानदार मेल देखने को मिला था. ऐसे में ‘बंटवारा 1947’ को लेकर दर्शकों की उम्मीदें भी काफी बढ़ गई हैं.

करीब तीन दशक बाद एक बार फिर साथ आए सनी देओल और राजकुमार संतोषी क्या अपनी पुरानी फिल्मों की तरह वही जादू दोहरा पाएंगे? क्या ‘घायल’, ‘दामिनी’ और ‘घातक’ जैसी फिल्मों की सफलता और प्रभाव की झलक ‘बंटवारा 1947’ में भी देखने को मिलेगी? अब यह देखना दिलचस्प होगा कि यह जोड़ी इस बार दर्शकों के लिए क्या नया लेकर आती है और क्या उनकी नई फिल्म एक बार फिर उनके पुराने जादू को पर्दे पर जीवंत कर पाती है.

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Fans Commented on Batwara 1947 Trailer: फिल्म के ट्रेलर पर लोगो कमैंट्स 

फिल्म के ट्रेलर लांच के बाद लोग जमकर कमैंट्स कर रहे है. इस फिल्म को पॉजिटिव और नेगेटिव दोनों रिस्पांस मिल रहा है. एक यूजर ने कहा कि फिल्म दूसरी गदर 2 हैं, तो वहीं दूसरे ने लिखा ‘गदर’ फिल्म की याद दिला दी.

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एक यूजर ने यह तक लिख दिया कि, यह फिल्म आमिर खान की प्रोपेगंडा फिल्म हैं, तो वहीं एक दूसरे यूजर ने कहा ब्लॉक बस्टर कन्फर्म है. 

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Gadar and Batwara 1947 Comparision: फिल्म बटवारा 1947 हो रही गदर से कमपेयर 

सनी देओल की फिल्म गदर- एक प्रेमकथा का यह डायलाग आज भी काफी फेमस है – “यह ढाई किलो का हाथ, जब किसी पर पड़ता है तो वो उठता नहीं, उठ जाता हैं” अब उनकी आने वाली फिल्म बटवारा 1947 में भी उनके बेटे (कारन देओल) को ऐसी ही कोई सिमिलर डायलाग बोलते हुए देखा जाता है, वो कहते है – “तू मेरे बाप को नहीं जानता, न घर देखेंगे न सरहद, सीधे घुस कर मारेंगे”. फिल्म में  ऐसे ही कई चीजों के सिमिलर होने के कारण लोग फिल्म बटवारा 1947 की तुलना सनी के ‘गदर: एक प्रेम कहानी से कर रहे हैं.

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दोनों फिल्मों की कहानी भारत के विभाजन और उस दौर की परिस्थितियों से जुड़ी हुई है, जहां देश के बंटवारे के साथ लोगों को हिंसा, दर्द और अपनों से बिछड़ने का सामना करना पड़ा था. हालांकि, ‘गदर’ की कहानी एक प्रेम कहानी के जरिए विभाजन के दर्द और एक पिता के अपने परिवार को बचाने के संघर्ष को दिखाती है, वहीं ‘बंटवारा 1947’ इस विषय को एक अलग नजरिए से पेश करने की कोशिश करती है.

फिल्म की कहानी पाकिस्तान में रहने वाले एक मुस्लिम व्यक्ति की है, जो अपने ही समुदाय की हिंसा से एक हिंदू महिला को बचाने का फैसला करता है. भारतीय फिल्मों में इस तरह की कहानी कम ही देखने को मिली है. खासतौर पर ऐसी कहानी को सनी देओल के साथ जोड़कर देखना और भी अलग लगता है.

यह भी पढ़ें: 16 साल की तपस्या है यह फिल्म! ‘बंटवारा 1947’ का ट्रेलर हुआ लॉन्च, इमोशनल हुए डायरेक्टर राजकुमार संतोषी



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