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34 साल पहले मिली जमीन, आज भी कब्जा नहीं, कटिहार में फलका के महादलित परिवारों ने प्रशासन से लगायी गुहार

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Mahadalit Land Dispute in Falka Katihar : कटिहार में सरकारी कागज में जमीन का मालिकाना हक मिलने के बावजूद अगर अपनी ही जमीन पर कदम रखने की इजाजत न हो, तो उस परिवार की स्थिति क्या होगी? फलका प्रखंड की शालेहपुर पंचायत के राजधानी गांव में करीब आधा दर्जन महादलित परिवार पिछले तीन से चार दशक से इसी सवाल के साथ जी रहे हैं. परिवारों का आरोप है कि सरकार ने उन्हें लाल कार्ड के माध्यम से जमीन आवंटित की, लेकिन करीब 30 से 34 साल बीत जाने के बाद भी वे अपनी आवंटित जमीन पर कब्जा नहीं पा सके हैं.

पीड़ित परिवारों का कहना है कि जिन जमीनों पर उन्हें अधिकार मिलना था, वहां दूसरे लोग कथित रूप से कब्जा कर खेती कर रहे हैं. फसल भी वही लोग उगा रहे हैं और उसका लाभ भी उठा रहे हैं. दूसरी ओर, जमीन आवंटित होने का दावा करने वाले परिवार आज भी प्रशासनिक कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं.

लाल कार्ड मिला, लेकिन जमीन पर नहीं मिला अधिकार

पीड़ित परिवारों के अनुसार, लकडू ऋषि, पिता फेकू ऋषि को 65 डिसमिल जमीन आवंटित की गयी थी. सामो ऋषि, पिता संचू ऋषि को 84 डिसमिल और सूर्युग ऋषि, पौत्र प्रदीप ऋषि को 84 डिसमिल जमीन मिलने का दावा है.

इसी तरह धनेश्री देवी, पति स्वर्गीय मिश्री ऋषि, मायावती देवी, पति स्वर्गीय गंगो ऋषि और भूमेसर ऋषि को एक-एक एकड़ जमीन आवंटित होने की बात कही गयी है. चंद्र ऋषि, पिता स्वर्गीय बासुदेव ऋषि को भी एक एकड़ जमीन आवंटित होने का दावा परिवार की ओर से किया गया है.

परिवारों का कहना है कि उनके पास जमीन से संबंधित कागजात मौजूद हैं. उनका दावा है कि वे लगातार जमीन की रसीद भी कटाते आ रहे हैं. इसके बावजूद जमीन पर वास्तविक कब्जा नहीं मिल सका है.

अपनी जमीन पर जाते हैं तो लाठी-डंडे से भगाने का आरोप

मामला सिर्फ जमीन पर कब्जे तक सीमित नहीं है. पीड़ित परिवारों ने आरोप लगाया है कि जब वे अपनी आवंटित जमीन पर कब्जा लेने पहुंचते हैं, तो वहां मौजूद कुछ लोग कथित रूप से लाठी-डंडे के बल पर उन्हें भगा देते हैं.

परिवारों का कहना है कि जमीन पर कब्जा दिलाने के लिए कई बार फलका अंचल कार्यालय में आवेदन दिया गया. इसके बाद सरकारी अमीन को जमीन की मापी के लिए भेजे जाने का भी दावा किया गया.

लेकिन पीड़ितों के मुताबिक, मौके पर मौजूद लोगों ने अमीन को भी कथित रूप से धमकाकर वापस भेज दिया. इस वजह से जमीन की मापी पूरी नहीं हो सकी और विवाद की वास्तविक स्थिति स्पष्ट नहीं हो पायी.

तीन दशक से ज्यादा समय से चल रहा जमीन का विवाद

महादलित परिवारों के मुताबिक, इस जमीन पर दूसरे लोगों का कब्जा पिछले करीब 30 से 34 वर्षों से है. इतने लंबे समय में कई पीढ़ियां बदल गयीं, लेकिन जमीन का विवाद खत्म नहीं हुआ.

परिवारों का कहना है कि अगर उन्हें उनकी आवंटित जमीन पर कब्जा मिल जाए, तो वे उस पर खेती कर सकेंगे. इससे उन्हें रोजी-रोटी का साधन मिलेगा और परिवारों की आर्थिक स्थिति भी बेहतर हो सकती है.

यही वजह है कि उनके लिए यह जमीन केवल संपत्ति नहीं, बल्कि परिवार के भविष्य और आजीविका से जुड़ा सवाल है.

कागज मौजूद, रसीद कट रही, फिर जमीन पर कब्जा क्यों नहीं?

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि परिवारों के पास जमीन आवंटन से जुड़े कागजात हैं और वे जमीन की रसीद कटाने का दावा कर रहे हैं, तो उन्हें अब तक वास्तविक कब्जा क्यों नहीं मिला?

दूसरा सवाल यह है कि सरकारी अमीन की मापी में आखिर कौन सी बाधा आ रही है और यदि किसी ने सरकारी कर्मी को धमकाया, तो उस पर क्या कार्रवाई हुई?

तीस से अधिक वर्षों से लंबित मामले में प्रशासनिक स्तर पर अब तक क्या कार्रवाई हुई, इसकी स्पष्ट जानकारी सामने आना भी जरूरी है.

महादलित परिवारों ने डीएम से लगायी न्याय की गुहार

पीड़ित महादलित परिवारों ने अब जिला पदाधिकारी और स्थानीय प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है. उनकी मांग है कि सरकारी स्तर पर जमीन की दोबारा मापी करायी जाए और जमीन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए.

परिवारों ने मापी के दौरान सुरक्षा उपलब्ध कराने की भी मांग की है, ताकि किसी तरह का दबाव या विवाद उत्पन्न न हो और सरकारी प्रक्रिया पूरी हो सके.

उनकी मांग है कि यदि जांच में जमीन का आवंटन सही पाया जाता है, तो उन्हें उनकी आवंटित जमीन पर विधिवत कब्जा दिलाया जाए.

Mahadalit Land Dispute in Falka Katihar: जमीन मिली तो बदलेगी परिवारों की जिंदगी

इन परिवारों के लिए तीन दशक पुराना यह विवाद सिर्फ कागज और सरकारी रिकॉर्ड का मामला नहीं है. जमीन मिलने का मतलब उनके लिए खेती, रोजगार और परिवार का भरण-पोषण करने का एक स्थायी साधन मिलना है.

पीड़ितों का कहना है कि वे वर्षों से अपनी जमीन पर अधिकार मिलने का इंतजार कर रहे हैं. अब उनकी उम्मीद प्रशासन पर टिकी है.

सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या 34 वर्षों से अपने हक की जमीन का इंतजार कर रहे इन महादलित परिवारों को अब वास्तविक कब्जा मिल पाएगा? प्रशासन की जांच और जमीन की मापी के बाद ही इस पुराने विवाद की वास्तविक तस्वीर साफ हो सकेगी.

पीड़ित महादलित परिवार कागजात के साथ आक्रोश करते हुवे | Prabhat Khabar Network
पीड़ित महादलित परिवार कागजात के साथ आक्रोश करते हुवे | Prabhat Khabar Network

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