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बिहार:नदी में ताश के पत्तों की तरह ढह गया पुल, बालू लदा ओवरलोड ट्रक भी समाया; कई गांवों का संपर्क टूटा – Purnia: Overloaded Sand Truck Collapses Iron Bridge In Amour; Vehicle Falls Into Parman River, Route Blocked

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पूर्णिया जिले के अमौर प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत तियरपाड़ा पंचायत स्थित असियान (असियानी) घाट पर रविवार को बड़ा हादसा हो गया। परमान नदी पर बना वर्षों पुराना लोहे का पुल उस समय अचानक टूटकर धराशायी हो गया, जब उस पर से बालू से लदा एक ओवरलोड ट्रक गुजर रहा था। पुल टूटने के साथ ही भारी-भरकम ट्रक सीधे उफनती परमान नदी के गहरे पानी में जा समाया। घटना रविवार दिन में करीब 11:30 बजे की बताई जा रही है।

हादसे के दौरान गनीमत रही कि पुल का ढांचा चरमराते ही चालक को खतरे का अहसास हो गया और उसने समय रहते नदी में छलांग लगा दी। इससे उसकी जान बाल-बाल बच गई। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल हो गया। देखते ही देखते नदी किनारे सैकड़ों ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, बालू लदा ओवरलोड ट्रक जैसे ही असियानी घाट के लोहे के पुल के बीचों-बीच पहुंचा, जर्जर ढांचा अत्यधिक भार सहन नहीं कर सका। तेज धमाके जैसी आवाज के साथ पुल दो हिस्सों में टूटकर नदी में जा गिरा।

पुल के ध्वस्त होने से जलालगढ़ से असियानी होते हुए अमौर को जोड़ने वाला मुख्य संपर्क मार्ग पूरी तरह अवरुद्ध हो गया है। सड़क संपर्क टूटने के कारण नदी के दोनों ओर बसे दर्जनों गांवों का प्रखंड और जिला मुख्यालय से सीधा संपर्क प्रभावित हो गया है। इससे स्थानीय लोगों के सामने आवागमन का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और विभागीय अमले में हड़कंप मच गया। घटना की पुष्टि करते हुए ग्रामीण कार्य विभाग के कार्यपालक अभियंता/एसडीओ कालेश्वर प्रसाद ने बताया कि पुल गिरने की जानकारी मिलते ही विभागीय तकनीकी विशेषज्ञों की टीम के साथ वे घटनास्थल के लिए रवाना हो गए हैं। स्थिति का जायजा लेने के बाद आगे का आकलन किया जाएगा।

वहीं, अमौर की अंचलाधिकारी शमीना खातून ने बताया कि एहतियात के तौर पर और नदी में किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए SDRF की टीम को तत्काल मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्य संभालने का निर्देश दिया गया है।

प्रशासन और निर्माण एजेंसी के खिलाफ जमकर नारेबाजी


घटना से आक्रोशित स्थानीय ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और निर्माण एजेंसी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। ग्रामीणों का कहना है कि यह लोहे का पुल दशकों पुराना और पूरी तरह जर्जर हो चुका था। ग्रामीणों की लगातार मांग के बाद करीब ढाई साल पहले इसके ठीक बगल में नए पक्के पुल के निर्माण को मंजूरी दी गई थी। लेकिन संवेदक और विभागीय अधिकारियों की कथित लापरवाही के कारण बीते ढाई वर्षों में नए पुल के महज दो पिलर (पाए) ही खड़े किए जा सके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि नया पक्का पुल समय पर बनकर तैयार हो जाता तो यह हादसा टाला जा सकता था।

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इसके साथ ही ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि इलाके में प्रशासन की कथित शह पर अवैध बालू खनन हो रहा है और जर्जर पुल से बेखौफ होकर भारी ओवरलोड ट्रकों का परिचालन कराया जा रहा है। स्थानीय नागरिकों ने जर्जर पुल के रखरखाव में कथित अनदेखी, अवैध ओवरलोडिंग पर रोक नहीं लगाने और नए पुल के निर्माण में हो रही देरी की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। उन्होंने दोषी ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की भी मांग की।

 

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