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बिहार:शिक्षक के वेतन भुगतान में लापरवाही पड़ी भारी, डीईओ और डीपीओ पर 50-50 हजार का जुर्माना – Bihar: Negligence In The Payment Of Teachers’ Salaries Proves Costly; Deo And Dpo Each Fined 50,000 Rupees.

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Bihar: Negligence in the payment of teachers' salaries proves costly; DEO and DPO each fined 50,000 rupees.

जिला शिक्षा पदाधिकारी
– फोटो : अमर उजाला

विस्तार

शिक्षक के वेतन भुगतान से जुड़े मामले में न्यायालय के आदेश का अनुपालन नहीं करना शिक्षा विभाग के दो अधिकारियों को भारी पड़ गया। बिहार राज्य शिक्षण संस्थान शिक्षक एवं कर्मचारी नियमावली, 2020 के नियम-16 के तहत सुनवाई करते हुए पीठासीन पदाधिकारी ने जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ), बक्सर और जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना), बक्सर पर 50-50 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है। दोनों अधिकारियों को 30 दिनों के भीतर निर्धारित विभागीय शीर्ष में जुर्माने की राशि जमा करने का निर्देश दिया गया है।


अधिवक्ता शशिकांत राय के अनुसार, मामले के अपीलार्थी संदीप कुमार, पिता युगल किशोर पाठक, प्राथमिक विद्यालय गुलाबी डेरा, भादा में पंचायत शिक्षक के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने वेतन भुगतान की मांग को लेकर अपील संख्या 05/2016 दायर की थी। सुनवाई के बाद उनके पक्ष में आदेश पारित किया गया था। इसमें एक महीने के भीतर मेधा सूची का अनुमोदन कर वेतन भुगतान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया था।

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विभाग की अपील भी हो चुकी थी खारिज

पूर्व के आदेश के खिलाफ शिक्षा विभाग ने राज्य अपीलीय प्राधिकार में अपील संख्या 98/2019 दायर की थी। हालांकि, प्राधिकार ने विभाग की अपील खारिज कर दी थी। इसके बावजूद आदेश का अनुपालन नहीं होने पर संदीप कुमार ने पटना हाईकोर्ट में सीडब्ल्यूजेसी संख्या 15074/2025 दायर की। हाईकोर्ट ने उन्हें नियम-16 के तहत आवेदन देने का निर्देश दिया था। इसके बाद मामले की सुनवाई हुई।

नोटिस का जवाब नहीं देने पर कार्रवाई

सुनवाई के दौरान विपक्षी पक्ष अनुपस्थित रहा। न्यायालय ने पाया कि जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय की ओर से बार-बार समय मांगा गया, लेकिन जारी कारण बताओ नोटिस का जवाब भी नहीं दिया गया। इसे न्यायालय के आदेश की जानबूझकर अवहेलना मानते हुए दोनों अधिकारियों पर 50-50 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया।

दोनों अधिकारियों को 30 दिनों के भीतर जुर्माने की राशि निर्धारित विभागीय शीर्ष में जमा करनी होगी। इस कार्रवाई के बाद शिक्षक के वेतन भुगतान से जुड़े मामले में पूर्व के न्यायिक आदेशों के अनुपालन का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है।

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