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Woman quitting her job and become waitress, viral video : जॉब छोड़कर वेट्रेस बनते ही महिला की पुरानी बीमारियां हुईं ठीक

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विदेशी की 33 वर्षीय सारामा कॉर्निश की कहानी इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। कॉर्पोरेट की 6-फिगर सैलरी वाली नौकरी छोड़कर वेट्रेस का काम करने वाली इस महिला ने दावा किया है कि तनाव से जुड़ी उनकी पुरानी बीमारियां एकदम ठीक हो गईं। उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया, जिसमें वह मुस्कुराते हुए रेस्तरां के फर्श पोछते दिख रही हैं। वे बताती हैं कि उसने अपनी कॉर्पोरेट डेस्क जॉब के आखिरी छह महीने अपनी बीमारी की जड़ का पता लगाने के लिए लगातार जांच-पड़ताल में बिताए। आखिरकार पता चला कि इसका कारण सिर्फ कॉर्पोरेट तनाव था।

इंस्टाग्राम पर शेयर किया वीडियो 

इस वीडियो को इंस्टग्राम पर @girlswhodetach नामक हैंडल से शेयर किया गया है। वीडियो के कैप्शन में सारामा कहती हेैं कि, ‘अपनी कॉर्पोरेट नौकरी के आखिरी 6 महीनों में, मैं सिर्फ हवा और पत्तों के सहारे जी रही थी और एक गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल विशेषज्ञ से हर तरह के टेस्ट करवा रही थी ताकि पता चल सके कि मेरे गंभीर आईबीएस का कारण क्या है। पता चला कि यह सिर्फ तनाव था और नौकरी छोड़ते ही मेरे सारे लक्षण गायब हो गए। मैं पहले से कहीं ज्यादा स्वस्थ हू।’ उसने जो वीडियो पोस्ट किया है, उसकी शुरुआत में लिखा है, ‘मैंने 33 साल की उम्र में एक वेट्रेस के रूप में काम करने के लिए लाखों की सैलरी वाली नौकरी छोड़ दी… और अगर इसका मतलब यह है कि मुझे फिर कभी तनाव से संबंधित आईबीएस के लक्षण न हों, तो मैं सचमुच अपनी बाकी जिंदगी इस फर्श को साफ करती रहूंगी। स्वास्थ्य ही धन है।’ वीडियो में वह मुस्कुराते हुए फर्श साफ करती हुई नजर आ रही है।

यूजर्स ने दी प्रतिक्रियाएं 

इस वीडियो को देखने के बाद इस पर कई यूजर्स की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। एक यूजर ने लिखा, ‘हमें जो कुछ स्वीकार करना सिखाया गया है, वह बिल्कुल ही बेतुका है।’ 


दूसरे ने लिखा कि, ‘लड़की, जो मन करे करो! पदनाम का कोई महत्व नहीं है जब तक तुम खुश और स्वस्थ हो!’ कॉर्निश ने जवाब दिया, ‘मैं पूरी तरह सहमत हूं।’

तीसरी महिला ने कहा, ‘मैं इससे पूरी तरह सहमत हूं! मैंने पिछले साल इमरजेंसी डिपार्टमेंट में नर्स के तौर पर अपनी फुल-टाइम नौकरी छोड़ दी थी, और अब मैं काम के लिए लैशेस और बोटॉक्स का काम करती हूँ, और मैं पहले से दस गुना ज़्यादा खुश और स्वस्थ महसूस करती हूं।’ 

एक व्यक्ति ने लिखा, ‘मैंने पिछली गर्मियों में वेट्रेस के रूप में काम किया। मुझे न्यूनतम वेतन मिलता था, जब काम कम होता था तो मुझे बिना वेतन के घर भेज दिया जाता था, और काम के दौरान कई पुरुषों ने मेरे साथ छेड़छाड़ की। मुझे नहीं लगता कि तनाव कम करने का यह उतना आसान तरीका है जितना आप कहते हैं। कम वेतन वाली, ग्राहकों से सीधे बातचीत वाली नौकरी भी बहुत तनावपूर्ण और असुरक्षित होती है, और भला वेट्रेस की नौकरी करके कौन अपना घर और बिल चुका सकता है? खासकर अगर उनका परिवार हो। मुद्दा यह नहीं है कि आप कौन सी नौकरी करते हैं। मुद्दा पूंजीवाद और यह सोच है कि इंसान एक वस्तु है। हमें मुश्किल से गुजारा करने के लिए बहुत ज्यादा घंटे काम करना पड़ता है।’ 

डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।

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