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जर्दालू आम से बदलेगी सुलतानगंज के किसानों की किस्मत,पनसल्ला गांव से शुरू होगी नई पहल

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Bhagalpur News: शुभंकर, सुलतानगंज. भागलपुर के जर्दालू आम की पहचान अब किसानों की आर्थिक समृद्धि का नया आधार बनने की तैयारी में है. अपनी खास मिठास और पहचान के लिए मशहूर इस आम की खेती का दायरा बढ़ाने के लिए बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर ने पहल की है. इसके तहत वर्ष 2026 के लिए सुलतानगंज प्रखंड के पनसल्ला गांव का चयन किया गया है. शनिवार को यहां इस अभियान की शुरुआत होगी, जिसमें किसानों को जर्दालू आम के पौधे वितरित किए जाएंगे.

इस पहल का उद्देश्य केवल आम के पौधे लगाना नहीं, बल्कि किसानों को बागवानी से जोड़कर उनकी आमदनी बढ़ाने की संभावनाएं मजबूत करना है. जर्दालू आम की बढ़ती मांग को देखते हुए उत्पादन का क्षेत्र विस्तार करने की तैयारी है. यदि किसानों को गुणवत्तापूर्ण पौधे, वैज्ञानिक मार्गदर्शन और बाजार में उपज का उचित मूल्य मिलता है, तो यह पहल सुलतानगंज के ग्रामीण इलाकों में खेती की तस्वीर बदलने में मददगार हो सकती है.

पनसल्ला गांव से जर्दालू की खेती को मिलेगी नई पहचान

भागलपुर जिले के प्रसिद्ध जर्दालू आम को जीआइ टैग मिलने के बाद इसकी पहचान और उत्पादन विस्तार को लेकर प्रयास किए जा रहे हैं. इसी कड़ी में बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर की ओर से उत्पादन बढ़ाने के लिए एक गांव का चयन किया जाना था. वर्ष 2026 के लिए पनसल्ला गांव को चुना गया है.

भागलपुरी जर्दालू आम उत्पादक संघ के अध्यक्ष और मैंगो मैन अशोक कुमार चौधरी के अनुसार, इस पहल के तहत किसानों के बीच जर्दालू आम के पौधे बांटे जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक किसान इसकी खेती से जुड़ सकें.

शनिवार को बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के कुलपति इस पहल का उद्घाटन करेंगे. कार्यक्रम की तैयारियां पूरी कर ली गयी हैं. इसमें कृषि वैज्ञानिकों, विश्वविद्यालय के अधिकारियों और क्षेत्र के गणमान्य लोगों के शामिल होने की संभावना है.

500 एकड़ से 1000 एकड़ तक पहुंचा खेती का दायरा

जर्दालू आम की खेती को लेकर सुलतानगंज प्रखंड में पिछले कुछ समय से विस्तार की पहल चल रही है. अशोक कुमार चौधरी के अनुसार, पहले प्रखंड में करीब 500 एकड़ क्षेत्र में जर्दालू आम का उत्पादन होता था. अब लगभग 1000 एकड़ क्षेत्र में इसके पौधे लगाए जा चुके हैं.

अब इस क्षेत्र को बढ़ाकर 2000 एकड़ से अधिक तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है. इसके लिए किसानों को जागरूक करने और उन्हें बागवानी से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है.

जर्दालू आम की मांग को देखते हुए उत्पादन क्षेत्र का विस्तार किसानों के लिए एक नया अवसर बन सकता है. पारंपरिक खेती के साथ आम की बागवानी अपनाने से किसान अपनी आय के स्रोतों में विविधता ला सकते हैं. हालांकि, इस दिशा में सफलता के लिए पौधों की देखभाल, उत्पादन की गुणवत्ता और बाजार तक पहुंच जैसे पहलुओं पर भी ध्यान देना होगा.

वैज्ञानिकों से मिल रही किसानों को खेती की जानकारी

जर्दालू आम की खेती का विस्तार करने के लिए बिहार कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों, अधिकारियों और भागलपुरी जर्दालू आम उत्पादक संघ के प्रतिनिधियों ने किसानों के साथ बैठकें की हैं. इन बैठकों में किसानों की सहमति, खेती का क्षेत्र बढ़ाने और उत्पादन में सुधार के उपायों पर चर्चा हुई है.

किसानों को पौधरोपण और बागवानी को आमदनी का बेहतर साधन बनाने के संबंध में जानकारी दी जा रही है. विश्वविद्यालय की पहल का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक तरीके से खेती करने के लिए प्रोत्साहित करना है, ताकि वे बेहतर उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ सकें.

पनसल्ला गांव का चयन इसी प्रयास का हिस्सा है. यहां से शुरू होने वाली पहल के माध्यम से अधिक किसानों को जर्दालू आम की खेती से जोड़ने की उम्मीद है. आगे इसका असर इस बात पर भी निर्भर करेगा कि किसानों को पौधों की उपलब्धता के साथ खेती के विभिन्न चरणों में कितना तकनीकी सहयोग मिलता है.

Bhagalpur News: उत्पादन बढ़ने के साथ बाजार पर भी देना होगा ध्यान

जर्दालू आम का उत्पादन बढ़ाना किसानों की आमदनी बढ़ाने की दिशा में अहम कदम हो सकता है, लेकिन केवल अधिक पौधे लगा देना ही पर्याप्त नहीं होगा. किसानों को उपज की गुणवत्ता बनाए रखने, बागों की नियमित देखभाल करने और बाजार की मांग के अनुरूप उत्पादन करने की जानकारी भी जरूरी होगी.

यदि बढ़ते उत्पादन के साथ किसानों को उचित कीमत और बेहतर विपणन व्यवस्था मिलती है, तो उन्हें अपनी उपज का अच्छा लाभ मिल सकता है. इससे स्थानीय स्तर पर बागवानी को बढ़ावा मिलने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की संभावना है.

जर्दालू आम की पहचान को और मजबूत करने के लिए किसानों, कृषि वैज्ञानिकों, उत्पादक संघ और संबंधित संस्थानों के बीच समन्वय भी महत्वपूर्ण रहेगा. पनसल्ला गांव से शुरू हो रही यह पहल इसी दिशा में एक नई कोशिश है. अब नजर इस बात पर रहेगी कि पौध वितरण और वैज्ञानिक मार्गदर्शन से कितने किसान जुड़ते हैं और आने वाले वर्षों में जर्दालू आम की खेती का दायरा लक्ष्य के अनुरूप कितना बढ़ पाता है.

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