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नवगछिया: राजस्थान के उदयपुर में शिक्षिका डॉ. अमृता ने किया बिहार का प्रतिनिधित्व, ‘आवर कल्चरल डायवर्सिटी’ प्रशिक्षण में लिया हिस्सा

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भागलपुर जिले के नवगछिया प्रखंड अंतर्गत रामधारी इंटर उच्च विद्यालय, तेतरी की शिक्षिका डॉ. अमृता ने राजस्थान के उदयपुर में आयोजित दस दिवसीय ‘आवर कल्चरल डायवर्सिटी’ (हमारी सांस्कृतिक विविधता) प्रशिक्षण कार्यक्रम में हिस्सा लेकर बिहार का प्रतिनिधित्व किया. केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के तत्वावधान में आयोजित इस राष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षण में देश के विभिन्न राज्यों से चयनित शिक्षकों ने भाग लिया. इसका मुख्य उद्देश्य भारतीय संस्कृति की विविधता को समझना और देश की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को स्कूली शिक्षा से जोड़ना था.

बिहार की लोक संस्कृति और कलाओं को राष्ट्रीय मंच पर किया साझा

प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान डॉ. अमृता ने बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को अन्य राज्यों के शिक्षकों के समक्ष प्रमुखता से रखा:

  • सांस्कृतिक आदान-प्रदान: उन्होंने बिहार की लोककला, लोक परंपराओं और सामाजिक जीवन के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी और राज्य की विविधता को प्रस्तुत किया.
  • विविधता में एकता: डॉ. अमृता ने कहा कि भारत की असली पहचान ‘विविधता में एकता’ है. इस प्रशिक्षण से उन्हें अन्य राज्यों की भाषा, कला, खान-पान, लोकगीत और लोकनृत्य को करीब से समझने का अवसर मिला.

गतिविधि और संस्कृति आधारित शिक्षण पर रहा जोर

दस दिवसीय कार्यशाला में विशेषज्ञों ने शिक्षकों को अनुभवात्मक शिक्षण की विधियों से अवगत कराया:

  • लोक परंपराओं की जानकारी: शिक्षकों को भारत की लोककला, लोकसंगीत, हस्तशिल्प, पारंपरिक ज्ञान और स्थानीय सांस्कृतिक विरासत के बारे में प्रशिक्षित किया गया.
  • सीखने की क्षमता में वृद्धि: विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि बच्चों को सिर्फ किताबी ज्ञान तक सीमित न रखकर स्थानीय संस्कृति और परंपराओं से जोड़कर पढ़ाने से उनकी रुचि और सीखने की क्षमता में वृद्धि होती है.
  • रचनात्मकता का विकास: पाठ्यक्रम में स्थानीय कला-संस्कृति को शामिल करने से विद्यार्थियों में जिज्ञासा, रचनात्मकता और अपनी विरासत के प्रति जागरूकता विकसित होगी.

स्कूल में विद्यार्थियों से साझा करेंगी अनुभव

डॉ. अमृता ने इस प्रशिक्षण को अत्यंत ज्ञानवर्धक बताते हुए कहा कि उदयपुर में सीखे गए अनुभव और गतिविधियों को वह विद्यालय के छात्र-छात्राओं के साथ साझा करेंगी, जिससे बच्चों में अपनी संस्कृति के प्रति गौरव और अन्य संस्कृतियों के प्रति सम्मान की भावना विकसित हो सके. वहीं, उनकी इस उपलब्धि पर विद्यालय परिवार और स्थानीय लोगों ने इसे क्षेत्र के लिए गौरव का विषय बताया है.

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