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भारतीय डाक से शराब :झारखंड से बिहार आकर कहां डाक पार्सल वैन में शराब की खेप पकड़ी गई? एक गिरफ्तार – Begusarai Liquor Seized Postal Parcel Pickup 1186 Litres Dumka Jharkhand Bihar Smuggling

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बिहार में शराबबंदी को लेकर सरकार लगातार सख्ती का दावा करती है, लेकिन साहेबपुरकमाल में डाक पार्सल पिकअप से 1,186.92 लीटर विदेशी शराब की बरामदगी ने निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब शराब की तस्करी रोकने के लिए निगरानी का दावा किया जा रहा है, तो झारखंड के दुमका से इतनी बड़ी खेप लेकर डाक पार्सल वाहन बिहार की सड़कों पर इतनी दूर तक कैसे पहुंच गया?

साहेबपुरकमाल थाना की संध्या गश्ती टीम ने एनएच-333बी स्थित हीरा टोल जीरोमाइल चौक के पास कार्रवाई करते हुए शराब लदी पिकअप को पकड़ा। तलाशी के दौरान वाहन से अलग-अलग ब्रांड की बड़ी मात्रा में विदेशी शराब बरामद हुई। पुलिस ने मौके से पिकअप के उपचालक कारण कुमार, निवासी मधेपुरा जिला, को गिरफ्तार कर लिया।

गुप्त सूचना पर पुलिस ने रोका वाहन

थाना प्रभारी राजेश कुमार के अनुसार पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि जेएच-10-बीपी-3305 नंबर की डाक पार्सल पिकअप झारखंड के दुमका से भारी मात्रा में शराब लेकर मुंगेर पुल के रास्ते हीरा टोल की ओर जा रही है। सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम ने वाहन जांच शुरू कर दी। इसी दौरान बताए गए नंबर की पिकअप को रोककर तलाशी ली गई। वाहन के अंदर शराब से भरे कार्टन देखकर पुलिसकर्मी भी हैरान रह गए। जांच में कुल 1,186.92 लीटर विदेशी शराब बरामद की गई।

क्या डाक पार्सल वाहन बन रहे तस्करी का नया जरिया?

शराब की इतनी बड़ी खेप डाक पार्सल वाहन से बरामद होने के बाद परिवहन और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। जिस तरह के वाहनों का सामान्य तौर पर पार्सल पहुंचाने के लिए इस्तेमाल होता है, उसी के जरिए करीब 1,187 लीटर शराब बिहार तक पहुंच गई। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या शराब तस्कर पुलिस और जांच एजेंसियों की नजर से बचने के लिए डाक पार्सल वाहनों का इस्तेमाल करने लगे हैं? साथ ही यह भी जांच का विषय है कि दुमका से निकलने के बाद यह वाहन किन-किन रास्तों से होकर बिहार पहुंचा और रास्ते में इसकी जांच क्यों नहीं हो सकी।

एक उपचालक गिरफ्तार, पूरे नेटवर्क की तलाश

पुलिस ने मामले में उपचालक कारण कुमार को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। हालांकि इतनी बड़ी शराब की खेप केवल एक व्यक्ति के भरोसे बिहार पहुंची होगी, यह मानना जांच के लिए पर्याप्त नहीं है। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि शराब कहां से लोड की गई थी, वाहन किसने उपलब्ध कराया था और इसे बिहार में किसे पहुंचाया जाना था। इसके अलावा इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं, इसकी भी जांच की जा रही है। पुलिस शराब की खेप के स्रोत और उसके संभावित खरीदार तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।

शराबबंदी के दावों पर फिर उठे सवाल

बिहार में शराबबंदी लागू हुए कई साल हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद लगातार बड़ी मात्रा में शराब बरामद होने के मामले सामने आते रहे हैं। हर बड़ी बरामदगी के बाद पुलिस कार्रवाई को अपनी उपलब्धि के तौर पर पेश करती है, लेकिन इसके साथ यह सवाल भी उठता है कि शराब की इतनी बड़ी खेप आखिर बिहार की सीमा में प्रवेश कैसे कर रही है। साहेबपुरकमाल में हुई यह बरामदगी भी एक तरफ पुलिस की कार्रवाई को सामने लाती है, तो दूसरी तरफ शराबबंदी की निगरानी व्यवस्था की उन कमजोर कड़ियों पर सवाल खड़े करती है, जिनका फायदा तस्कर उठाने की कोशिश कर रहे हैं। विपक्ष को भी सरकार के शराबबंदी के दावों पर सवाल उठाने का एक और मुद्दा मिल गया है। फिलहाल पुलिस ने उत्पाद अधिनियम की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है और शराब तस्करी के पूरे नेटवर्क की पड़ताल शुरू कर दी है। अब जांच में यह सामने आना बाकी है कि कार्रवाई केवल वाहन और उपचालक तक सीमित रहती है या पुलिस इस खेप के पीछे काम कर रहे पूरे तस्करी नेटवर्क तक पहुंच पाती है।

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