Home अंग प्रदेश मौत के बाद भी देश के काम आएगा भागलपुर की रीना का...

मौत के बाद भी देश के काम आएगा भागलपुर की रीना का शरीर, बोलीं- 'राख होने से बेहतर है वीर जवानों के काम आना'

18
0

[ad_1]

भागलपुर की विष्णु प्रिया रीना उर्फ रीना मजुमदार ने जिंदगी के बाद भी देश और समाज की सेवा करने का संकल्प लिया है. उन्होंने मरणोपरांत अपने शरीर के करीब 80 प्रतिशत अंग दान करने का निर्णय लिया है. रीना की इच्छा है कि उनके शरीर के अंग सबसे पहले देश की रक्षा में तैनात जवानों के काम आएं और जो अंग उपयोग में न आ सकें, उनका इस्तेमाल गरीब और जरूरतमंद लोगों के हित में किया जाए. उनका कहना है कि शरीर के राख हो जाने से बेहतर है कि उसका कोई अंग किसी की जिंदगी बचाने में काम आए.

बचपन में देखा था देहदान का सपना

रीना बताती हैं कि बचपन में जब उन्होंने लोगों के नेत्रदान के बारे में सुना, तभी उनके मन में देहदान का विचार आया. कक्षा नौवीं-दसवीं में पढ़ाई के दौरान उन्होंने मन ही मन तय कर लिया था कि मृत्यु के बाद उनका शरीर देश और समाज के काम आएगा. वर्षों बाद भी उनका यह संकल्प कायम रहा और वर्ष 2019 में उन्होंने देहदान के लिए अपना संकल्प पूरा किया.

जवानों के लिए अंगदान करना चाहती हैं रीना

रीना का कहना है कि देश की सीमा पर जवान अपने प्राणों की बाजी लगाकर लोगों की रक्षा करते हैं. ऐसे में यदि उनके शरीर का कोई अंग किसी जवान की जिंदगी बचाने में काम आ जाए तो इससे बड़ी देशसेवा उनके लिए कुछ नहीं होगी.

उन्होंने कहा कि उनकी प्राथमिक इच्छा है कि उनके शरीर से उपयोगी अंग देश की रक्षा में तैनात सैनिकों के काम आएं. यदि कोई अंग वहां उपयोगी नहीं हो सके तो उसे गरीब और जरूरतमंद लोगों के उपचार में इस्तेमाल किया जाए.

परिवार ने भी दिया संकल्प में साथ

रीना ने अपने इस निर्णय में सहयोग के लिए पति जयदेव कुमार, बड़ी बेटी रूति राजेश्वरी और छोटी बेटी प्राची श्री के प्रति आभार जताया. उनका कहना है कि परिवार के सहयोग के बिना इस संकल्प को आगे बढ़ाना आसान नहीं होता.

देहदान का रास्ता नहीं था आसान

रीना बताती हैं कि देहदान का संकल्प लेने के बाद उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा. उन्होंने भागलपुर के सरकारी अस्पतालों और कई अधिकारियों से संपर्क किया, लेकिन शुरुआती दौर में उन्हें अपेक्षित सहयोग नहीं मिला. इसके बाद उन्होंने कई संगठनों से संपर्क किया और ऑनलाइन माध्यम से देहदान की प्रक्रिया के बारे में जानकारी जुटाई.

काफी प्रयास के बाद उन्हें आयुष्मान भारत पोर्टल के माध्यम से अपने संकल्प को पूरा करने का रास्ता मिला. उन्होंने कहा कि कई बार निराशा हुई, लेकिन उन्होंने अपना संकल्प नहीं छोड़ा.

राढ़ी बांधव समिति ने किया सम्मानित

रीना ने बताया कि वह राढ़ी बांधव समिति की सदस्य भी हैं. देहदान के लिए समिति की ओर से उन्हें सम्मानित किया जा चुका है. उनका कहना है कि उनके समाज में वह पहली महिला हैं, जिन्होंने अपना पूरा शरीर दान करने का संकल्प लिया है.

अंगदान के लिए जागरूकता की जरूरत

रीना का मानना है कि समाज में अंगदान और देहदान को लेकर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि सांसद, विधायक और अन्य जनप्रतिनिधियों को इस दिशा में आगे आना चाहिए, ताकि अधिक से अधिक लोग अंगदान के महत्व को समझ सकें.उन्होंने कहा कि किसी जरूरतमंद की जिंदगी बचाने के लिए किया गया अंगदान सबसे बड़ा दान हो सकता है. उनका संकल्प मौत के बाद भी किसी के जीवन में उम्मीद बनकर जीवित रहने की मिसाल पेश करता है.

The post मौत के बाद भी देश के काम आएगा भागलपुर की रीना का शरीर, बोलीं- 'राख होने से बेहतर है वीर जवानों के काम आना' appeared first on Prabhat Khabar.

[ad_2]

Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here