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बिहार कृषि एप और फार्मर आईडी निबंधन पर रहेगा जोर; किसान सलाहकार समिति की बैठक में जिला कृषि पदाधिकारी ने किया बड़ा आह्वान

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Katihar News: कटिहार के संयुक्त कृषि भवन में सोमवार को जिला स्तरीय किसान सलाहकार समिति की बैठक आयोजित की गई. बैठक में किसानों को सरकारी योजनाओं का अधिकतम लाभ दिलाने, बिहार कृषि एप पर अधिक से अधिक निबंधन कराने, एग्री स्टैक और फार्मर आईडी तैयार कराने तथा प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया. साथ ही जूट की खेती के बाद खाली खेतों में अलसी और नदी की तराई व परती भूमि में खस घास की खेती की संभावनाओं पर चर्चा हुई. प्रगतिशील किसानों को प्रशिक्षण और परिभ्रमण से जोड़ने की बात भी कही गई.

किसानों की सक्रिय भागीदारी पर दिया जोर

बैठक का शुभारंभ जिला कृषि पदाधिकारी-सह-परियोजना निदेशक, आत्मा राजीव कुमार ने किया. उन्होंने प्रखंडों से आए किसान सलाहकार समिति के अध्यक्षों से जिले के कृषि क्षेत्र के समग्र विकास के लिए सक्रिय सहभागिता की अपील की.

उन्होंने आत्मा की ओर से संचालित विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए किसानों तक विभागीय योजनाओं का अधिकतम लाभ पहुंचाने पर जोर दिया.

बिहार कृषि एप और फार्मर आईडी पर जोर

राजीव कुमार ने किसान सलाहकार समिति के अध्यक्षों से बिहार कृषि एप पर अधिक से अधिक किसानों का निबंधन कराने का आग्रह किया. उन्होंने एग्री स्टैक और फार्मर आईडी तैयार कराने की प्रक्रिया को भी प्राथमिकता देने की बात कही.

इसके साथ ही मृदा परीक्षण, मृदा स्वास्थ्य सुधार, प्राकृतिक खेती और अन्य किसान हितकारी कार्यक्रमों को प्रभावी तरीके से लागू कराने पर जोर दिया गया.

प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा देने की अपील

बैठक में किसानों को रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने और प्राकृतिक एवं जैविक विकल्प अपनाने के लिए प्रेरित करने पर चर्चा हुई. जैव उर्वरक, हरी खाद तथा गोबर और गौमूत्र से जीवामृत, बीजामृत एवं घनजीवामृत तैयार कर किसानों के समूहों और एफपीओ के माध्यम से इनके उपयोग को बढ़ावा देने का सुझाव दिया गया.

दलहन-तिलहन मिशन और जलवायु अनुकूल खेती पर जोर

जिला कृषि पदाधिकारी ने दलहन एवं तिलहन मिशन को सफल बनाने तथा जिले के सभी प्रखंडों में जलवायु अनुकूल कृषि को प्रभावी ढंग से बढ़ावा देने की अपील की. उन्होंने कहा कि बदलती जलवायु परिस्थितियों को देखते हुए किसानों को टिकाऊ और लाभकारी कृषि तकनीकों से जोड़ना जरूरी है.

जूट के बाद खाली खेतों में अलसी की खेती पर चर्चा

बैठक में जूट की खेती के बाद खाली होने वाले खेतों में फ्लैक्स यानी अलसी की खेती को बढ़ावा देने की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया गया. बताया गया कि अलसी से प्राप्त उच्च गुणवत्ता वाले रेशे से लिनेन वस्त्र तैयार किए जाते हैं और बाजार में इसकी मांग एवं मूल्य बेहतर है.

अधिकारियों का मानना है कि इससे किसानों की आय बढ़ाने के साथ फसल विविधीकरण को भी बढ़ावा मिल सकता है.

परती और नदी की तराई में खस घास की खेती का सुझाव

प्रखंडों में नदी की तराई और अन्य परती भूमि में उपयुक्त स्थानों पर खस घास की खेती को बढ़ावा देने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई. किसान सलाहकार समिति के अध्यक्षों से स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार किसानों को ऐसी वैकल्पिक और लाभकारी कृषि गतिविधियों से जोड़ने का आग्रह किया गया.

प्रशिक्षण के लिए प्रगतिशील किसानों का होगा चयन

Katihar News: उप परियोजना निदेशक, आत्मा शशिकांत झा ने अधिक से अधिक किसानों को समूहों से जोड़कर उन्हें तकनीकी प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण का लाभ दिलाने पर जोर दिया. परियोजना निदेशक, आत्मा दीक्षा कुमारी ने किसानों के ज्ञान और कौशलवर्धन के लिए जिला के अंदर, राज्य के अंदर तथा राज्य के बाहर प्रशिक्षण एवं परिभ्रमण के लिए नए और प्रगतिशील किसानों को चिन्हित करने का अनुरोध किया.

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