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Bihar News:अनोखी कांवड़ और बुजुर्ग महिला की अद्भुत आस्था, असरगंज कच्ची कांवरिया पथ पर दिखा भक्ति का अनोखा रंग – Unique Kanwar, Remarkable Faith On Asarganj Kanwariya Path

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सावन का पावन महीना अब अंतिम पड़ाव पर है, लेकिन शिवभक्तों की आस्था और उत्साह में कोई कमी नहीं आई है। असरगंज के कच्ची कांवरिया पथ पर इन दिनों भक्ति के ऐसे कई रंग देखने को मिल रहे हैं, जो लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रहे हैं। कहीं 144 किलो की विशाल रावण कांवड़ आकर्षण का केंद्र बनी हुई है तो कहीं करीब 65 से 66 साल की सत्यभामा देवी अकेले दंडवत प्रणाम करते हुए 105 किलोमीटर की कठिन यात्रा पर निकली हैं। दोनों ही तस्वीरें यह दिखा रही हैं कि भगवान भोलेनाथ के प्रति सच्ची आस्था उम्र और मुश्किलों की मोहताज नहीं होती।

144 किलो की रावण कांवड़ बनी आकर्षण का केंद्र

असरगंज के कच्ची कांवरिया पथ पर पश्चिम बंगाल से पहुंचे शिवभक्तों की विशाल रावण कांवड़ लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। इस कांवड़ में रावण की विशाल प्रतिमा बनाई गई है, जिसमें रावण बाबा बैद्यनाथ को जल अर्पित करते हुए नजर आ रहे हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि रावण भगवान शिव के परम भक्त थे। इसी आस्था के साथ वे रावण की प्रतिमा लेकर देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम जा रहे हैं।

श्रद्धालुओं के मुताबिक यह उनकी इस तरह की पहली यात्रा है। उनके साथ कुल 22 श्रद्धालुओं का जत्था भी चल रहा है। इस अनोखी कांवड़ को तैयार करने में करीब तीन सप्ताह का समय लगा और इसका वजन लगभग 144 किलो है। इतनी भारी और आकर्षक कांवड़ को लेकर श्रद्धालु सुल्तानगंज से गंगाजल भरकर बाबा बैद्यनाथ धाम की ओर बढ़ रहे हैं। शिवभक्तों की बाबा भोलेनाथ से बस यही प्रार्थना है कि उनकी पूरी टोली सुरक्षित और सकुशल बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंचे और उन्हें बाबा का आशीर्वाद प्राप्त हो।

65 साल की सत्यभामा देवी की दंडवत यात्रा ने किया भावुक

कांवरिया पथ पर आस्था की एक और तस्वीर लोगों को भावुक कर रही है। करीब 65 से 66 वर्ष की सत्यभामा देवी अकेले दंडवत प्रणाम करते हुए 105 किलोमीटर की पदयात्रा कर बाबा बैद्यनाथ धाम जा रही हैं। सत्यभामा देवी के मुताबिक वह अपनी मन्नत पूरी करने के लिए यह कठिन यात्रा कर रही हैं। वह 5 तारीख को घर से निकली थीं और 6 तारीख से उन्होंने दंडवत यात्रा शुरू की। उम्र के इस पड़ाव पर भी उनका हौसला और भगवान के प्रति विश्वास लोगों को हैरान कर रहा है। यात्रा के दौरान वह बेहद सादा जीवन अपना रही हैं। दिन में एक बार नाश्ता या नारियल पानी लेती हैं, जबकि रात में रोटी के साथ मिर्च और नमक खाकर अपनी यात्रा जारी रखती हैं।

दोपहर में रुककर करती हैं भगवान का नाम जप

सत्यभामा देवी दोपहर करीब 1 से 2 बजे के बीच विश्राम करती हैं। उनका मानना है कि इस समय यात्रा करना पितृदोष से जुड़ा माना जाता है। इसलिए वह इस दौरान यात्रा रोककर भगवान का नाम जपती हैं और फिर आगे बढ़ती हैं। सत्यभामा देवी वर्ष 2024 में शिक्षिका के पद से सेवानिवृत्त हुई हैं। उनके परिवार में एक बेटा और एक बेटी है। उनका बेटा टेक्सटाइल मिल में काम करता है। परिवार से दूर अकेले रहते हुए भी वह भगवान का नाम जपती हैं और इसी आस्था के सहारे अपनी कठिन यात्रा पूरी कर रही हैं।

ट्रॉली बैग में मोबाइल से लेकर जरूरी सामान

यात्रा के दौरान सुरक्षा और जरूरी सामान रखने के लिए सत्यभामा देवी अपने साथ एक ट्रॉली बैग लेकर चल रही हैं। इसमें मोबाइल, कपड़े और दूसरी जरूरी चीजें रखी हैं। यात्रा के दौरान वह फोन पर लगातार अपने परिवार के लोगों से भी बात करती रहती हैं। असरगंज के कच्ची कांवरिया पथ पर एक तरफ 144 किलो की विशाल रावण कांवड़ भक्ति और आकर्षण का केंद्र बनी हुई है, तो दूसरी तरफ सत्यभामा देवी की दंडवत यात्रा लोगों को आस्था और संकल्प की ताकत का एहसास करा रही है। कहते हैं कि जब आस्था सच्ची हो तो रास्ते की मुश्किलें भी छोटी लगने लगती हैं। असरगंज के कच्ची कांवरिया पथ पर दिख रही ये तस्वीरें भी यही संदेश दे रही हैं कि बाबा भोलेनाथ के भक्तों के लिए मंजिल से ज्यादा महत्वपूर्ण उनका विश्वास और संकल्प है।

 

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