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पूर्वी चंपारण पुलिस महकमे में गुरुवार को बड़ा प्रशासनिक संदेश गया, जब रामगढ़वा थाना के तत्कालीन थानाध्यक्ष राजीव कुमार साह को गंभीर कर्तव्यहीनता और अनुशासनहीनता के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। पश्चिम चंपारण रेंज के डीआईजी हरिकिशोर राय ने विभागीय जांच में आरोपों की पुष्टि होने के बाद यह कार्रवाई की। उन पर अपहरण के एक मामले में समय पर कानूनी कार्रवाई नहीं करने, कथित अपहरणकर्ता को छोड़ देने और अपहरण के शिकार व्यक्ति को ही करीब 24 घंटे तक अवैध रूप से थाना हाजत में बंद रखने का आरोप सिद्ध हुआ है।
अपहरण की शिकायत से शुरू हुआ पूरा मामला
मामले की शुरुआत रामगढ़वा थाना क्षेत्र के रखवरिया गांव निवासी सुनीता देवी की शिकायत से हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि 15 जून 2026 को उनके पति बालकन्हाई महतो का अपहरण कर लिया गया। सूचना मिलने पर डायल-112 की टीम ने कार्रवाई करते हुए बालकन्हाई महतो और कथित अपहरणकर्ता दोनों को बरामद कर थाना पहुंचाया।
पीड़ित हाजत में बंद, आरोपी को छोड़ने का आरोप
शिकायत के अनुसार, थाना पहुंचने के करीब एक घंटे के भीतर कथित अपहरणकर्ता को छोड़ दिया गया, जबकि अपहरण के शिकार बालकन्हाई महतो को बिना किसी वैधानिक प्रक्रिया के लगभग 24 घंटे तक थाना हाजत में बंद रखा गया। इस घटना को लेकर उच्चाधिकारियों के निर्देश पर विभागीय जांच कराई गई, जिसमें तत्कालीन थानाध्यक्ष की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हुए।
सूदखोरी के मामले में भी बरती गई लापरवाही
विभागीय जांच के दौरान एक और गंभीर तथ्य सामने आया। जांच में पाया गया कि क्षेत्र में सूदखोरी की शिकायतों की जानकारी होने के बावजूद तत्कालीन थानाध्यक्ष ने संबंधित आरोपित के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज नहीं कराई। उसे केवल पूछताछ के लिए थाने बुलाया गया और बिना किसी कानूनी कार्रवाई के छोड़ दिया गया। जांच अधिकारियों ने इसे कानून के प्रति लापरवाही और कर्तव्य की अनदेखी माना।
डीआईजी ने किया निलंबित
डीआईजी कार्यालय, पश्चिम चंपारण रेंज, बेतिया ने 27 जून को राजीव कुमार साह से स्पष्टीकरण मांगा था। 29 जून को दिया गया उनका जवाब विभागीय समीक्षा में असंतोषजनक पाया गया। इसके बाद डीआईजी ने अपने आदेश में कहा कि संबंधित अधिकारी का आचरण गंभीर लापरवाही, अनुशासनहीनता और मनमाने रवैये का परिचायक है, जिससे पुलिस विभाग की छवि धूमिल हुई और आम जनता का पुलिस पर विश्वास प्रभावित हुआ।
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पुलिस महकमे में सख्त संदेश
इन्हीं तथ्यों के आधार पर तत्कालीन थानाध्यक्ष को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है। पुलिस महकमे में इस कार्रवाई को अनुशासन और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
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