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Kolkata Warehouse Roof Collapse Families Of Munger Workers Seek Safe Return Of Injured Laborers – Bihar News

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पश्चिम बंगाल के कोलकाता स्थित तारातला इलाके में निर्माणाधीन गोदाम की छत गिरने से हुए दर्दनाक हादसे के बाद धरहरा प्रखंड के मिर्जाचक लगमा और मानगढ़ गांव में मातम का माहौल है। घटना के 24 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बावजूद परिजनों को अपने स्वजनों की स्थिति की स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पाने से चिंता और बढ़ गई है। पीड़ित परिवारों का आरोप है कि अब तक जिला प्रशासन का कोई अधिकारी उनसे मिलने नहीं पहुंचा है।

एक ही परिवार के छह सदस्य हादसे की चपेट में

बताया जाता है कि हेमजापुर पंचायत के वार्ड संख्या-13 मिर्जाचक लगमा निवासी राजेंद्र राम अपने पांच पुत्रों रोहित कुमार (28), सोहित कुमार (26), मनु कुमार (24), मानिकचंद (20) और घी कुमार (18) के साथ कोलकाता में मजदूरी करते थे। उनके साथ भाई पप्पू राम का 19 वर्षीय पुत्र श्रीचन कुमार भी कार्यरत था।

छत गिरते ही मलबे में दब गए कई मजदूर

बुधवार को तारातला स्थित निर्माणाधीन गोदाम में काम के दौरान अचानक छत भरभराकर गिर गई, जिससे कई मजदूर मलबे में दब गए। हादसे में घी कुमार और मानगढ़ गांव निवासी जवाहर राम के पुत्र नवीन कुमार की मौत हो गई, जबकि श्रीचन कुमार अब तक लापता बताया जा रहा है। वहीं राजेंद्र राम, सोहित कुमार, मनु कुमार और मानिकचंद गंभीर रूप से घायल हैं और कोलकाता के विभिन्न अस्पतालों में उनका इलाज चल रहा है।

‘फोन पर कहा था, हम सब मलबे में दब गए हैं’

मृतक घी कुमार की मां मीरा देवी ने रोते हुए बताया कि घटना के समय बेटे सोहित से फोन पर बात हुई थी। उसने बताया था कि सभी लोग मलबे में दब गए हैं। इसके बाद किसी से कोई संपर्क नहीं हो पाया। उन्होंने सरकार से सभी घायलों को सुरक्षित घर पहुंचाने और परिवार की मदद करने की मांग की।

24 घंटे बाद भी लापता बेटे का नहीं मिला सुराग

श्रीचन कुमार की मां बेबी देवी ने कहा कि घटना की सूचना मिलने के बाद से पूरा परिवार सदमे में है। 24 घंटे बीत जाने के बाद भी बेटे का कोई पता नहीं चल पाया है। उन्होंने बताया कि आर्थिक तंगी के कारण श्रीचन ने नौवीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी और पिछले एक वर्ष से कोलकाता में मजदूरी कर रहा था।

परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर लगाए आरोप

घायलों की पत्नियां अनीता कुमारी, प्रियंका कुमारी और लक्ष्मी कुमारी ने बताया कि हादसे से पहले उनके पतियों से फोन पर बात हुई थी, लेकिन उसके बाद संपर्क नहीं हो सका। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल में भर्ती परिजनों से मिलने तक नहीं दिया जा रहा है और न ही उनकी स्थिति की सही जानकारी दी जा रही है।

‘बिहार में रोजगार होता तो बाहर नहीं जाते मजदूर’

ग्रामीण महिलाओं ने सरकार पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि बिहार में पर्याप्त रोजगार उपलब्ध होता तो गरीब मजदूरों को दूसरे राज्यों में जाकर काम नहीं करना पड़ता। उन्होंने मृतकों के परिजनों को मुआवजा, घायलों के बेहतर इलाज और सभी मजदूरों को सुरक्षित घर पहुंचाने की मांग की।

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सुरक्षा मानकों की अनदेखी का आरोप

घटना स्थल से एक दिन पहले लौटे मजदूर कन्हैया राम ने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जा रही थी। उन्होंने कहा कि ढलाई का काम गलत तरीके से कराया जा रहा था, जिसके कारण यह बड़ा हादसा हुआ। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।

गांव में पसरा सन्नाटा

इस दर्दनाक हादसे ने पूरे क्षेत्र को झकझोरकर रख दिया है। गांवों में मातम पसरा हुआ है और परिजन अपने प्रियजनों की सलामती की दुआ कर रहे हैं। साथ ही प्रशासन और सरकार से त्वरित सहायता एवं ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

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