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Muzaffarpur Bihar News : Six People Died In Prasad Hospital Incident Including Ldc Public Anger Is Mounting – Bihar News

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बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के ब्रह्मपुरा थाना क्षेत्र स्थित प्रसाद अस्पताल के आईसीयू में लगी भीषण आग ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं। इस दर्दनाक हादसे में कई मरीजों की मौत हो गई, जिसके बाद परिजनों में मातम पसरा हुआ है। अस्पताल परिसर से लेकर मृतकों के गांव तक हर ओर शोक का माहौल है। परिजन रो-रोकर बेहाल हैं और अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगा रहे हैं। इस हादसे में जान गंवाने वालों में सरकारी कर्मचारी, बुजुर्ग मरीज, महिला और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे अन्य मरीज शामिल हैं। मृतकों में मुजफ्फरपुर जिले के तीन, सीतामढ़ी जिले के दो और शिवहर जिले का एक मरीज शामिल बताया जा रहा है।

शादी से पहले बुझ गया घर का चिराग, वित्त विभाग के कर्मचारी की मौत

इस दर्दनाक हादसे में औराई थाना क्षेत्र के रतनपुर गांव निवासी 30 वर्षीय शशांक कुमार की भी मौत हो गई। वह पटना के वित्त विभाग में एलडीसी के पद पर कार्यरत थे। परिजनों ने बताया कि 29 मई को एक सड़क हादसे में वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे। सिर में गंभीर चोट लगने के बाद बेहतर इलाज के लिए उन्हें प्रसाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। दो दिन पहले ही उनके मस्तिष्क का ऑपरेशन हुआ था और ऑपरेशन सफल बताया गया था। हालांकि वह वेंटिलेटर पर थे। परिजनों का कहना है कि उन्हें क्या पता था कि अस्पताल में ऐसा हादसा हो जाएगा, वरना वे उन्हें यहां कभी भर्ती नहीं कराते। आग लगने के बाद उनकी मौत हो गई, जिससे पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

किसान भी बने हादसे का शिकार

मीनापुर प्रखंड के रामपुरहरी थाना क्षेत्र के गोरिगामा गांव निवासी 76 वर्षीय कृष्ण नंदन सिंह भी इस हादसे में जान गंवाने वालों में शामिल हैं। उनके पुत्र ने बताया कि सीने और पेट की बीमारी के कारण एक सप्ताह पहले उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालत गंभीर होने पर उन्हें आईसीयू में रखा गया था। घटना के बाद अस्पताल प्रशासन ने परिवार को सही जानकारी भी नहीं दी। बाद में मेडिकल कॉलेज पहुंचने पर उन्हें मौत की सूचना मिली। परिजनों ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

किडनी का इलाज करा रहीं महिला की भी गई जान

मोतीपुर प्रखंड के बिस्तौलिया गांव निवासी 62 वर्षीय गीता देवी की भी आईसीयू में लगी आग की चपेट में आने से मौत हो गई। परिजनों ने बताया कि वह किडनी की बीमारी से पीड़ित थीं और पिछले छह महीनों से नियमित रूप से प्रसाद अस्पताल में डायलिसिस करा रही थीं। इस बार भी इलाज के लिए अस्पताल आई थीं, लेकिन हादसे ने उनकी जिंदगी छीन ली। परिवार का कहना है कि यह गंभीर लापरवाही का मामला है और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। घटना के समय उनका डायलिसिस चल रहा था।

ब्रेन सर्जरी के बाद इलाज के लिए आए मरीज की भी मौत

सीतामढ़ी जिले के 57 वर्षीय उदय कुमार भी इस हादसे का शिकार हो गए। परिजनों के अनुसार दो महीने पहले गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल में उनकी ब्रेन सर्जरी हुई थी। डॉक्टरों की सलाह पर चार दिन पहले उन्हें प्रसाद अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया था। आग लगने की सूचना मिलने पर जब परिवार के लोग अस्पताल पहुंचे, तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। परिजनों का आरोप है कि यदि समय रहते बचाव कार्य किया जाता तो उनकी जान बचाई जा सकती थी। उन्होंने इस घटना के लिए अस्पताल प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया है।

पैर का ऑपरेशन हुआ, लेकिन अस्पताल की आग ने छीन ली जिंदगी

सीतामढ़ी जिले के बेलसंड प्रखंड के रूपौली गांव निवासी 60 वर्षीय चंचला वर्मा की मौत भी इस अग्निकांड में हो गई। परिजनों ने बताया कि एक दिन पहले घर में गिरने से उनका पैर टूट गया था। इलाज के लिए उन्हें मुजफ्फरपुर लाया गया था। ऑपरेशन के बाद चिकित्सकों ने उन्हें आईसीयू में शिफ्ट किया था।परिवार को उम्मीद थी कि वह जल्द स्वस्थ होकर घर लौटेंगी, लेकिन अस्पताल में लगी आग ने उनकी जिंदगी छीन ली। परिजनों का कहना है कि वह पूरी तरह स्वस्थ होने की ओर बढ़ रही थीं, लेकिन अस्पताल की घोर लापरवाही ने उन्हें उनसे हमेशा के लिए दूर कर दिया।

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परिजनों ने उठाए गंभीर सवाल

हादसे के बाद मृतकों के परिजनों में भारी आक्रोश है। उनका आरोप है कि अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था और आपातकालीन प्रबंधन की भारी कमी थी। उनका कहना है कि यदि समय पर राहत और बचाव कार्य किया जाता तो कई जिंदगियां बचाई जा सकती थीं।

फिलहाल मामले की जांच जारी है। जिला प्रशासन और संबंधित एजेंसियां आग लगने के कारणों की पड़ताल कर रही हैं। वहीं पीड़ित परिवार दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और न्याय की मांग कर रहे हैं।

 

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