Home अंग प्रदेश तपती धूप व बिजली कटौती से मखाना किसानों की फसल पर संकट

तपती धूप व बिजली कटौती से मखाना किसानों की फसल पर संकट

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मनसाही से ललित कुमार की रिपोर्ट

Makhana Crop Damage: सीमांचल के मुख्य नकदी और कीमती फसलों में शुमार मखाना (फॉक्स नट) की खेती पर इस वर्ष मौसम की मार और प्रशासनिक ढुलमुल रवैये का गहरा साया मंडराने लगा है. कटिहार जिले के मनसाही प्रखंड क्षेत्र में लगातार बढ़ रहे पारे और भीषण लू (Heatwave) के कारण मखाना किसान दोहरी मुसीबत में फंस गए हैं. आसमान से बरसती आग खेतों के पानी को तेजी से सोख रही है, जिससे पौधे सूखने और पत्तियां जलने की कगार पर पहुंच गई हैं. इस संकट के समय फसल को बचाने के लिए सबसे जरूरी पटवन है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में जारी भारी बिजली कटौती और लो-वोल्टेज ने किसानों के हाथ बांध दिए हैं. फसल को अपनी आंखों के सामने बर्बाद होता देख किसानों में भारी मायूसी और आक्रोश का माहौल है.

38 डिग्री के पार पहुंचा पारा; खेत की मिट्टी दरकने से मुरझाए पौधे

  • भाप बनकर उड़ रहा पानी: पिछले कई दिनों से जिले का अधिकतम तापमान 38 डिग्री सेल्सियस के पार दर्ज किया जा रहा है. कड़क धूप के कारण मखाना के तालाबों और जलजमाव वाले खेतों का पानी तेजी से वाष्पीकृत (भाप) होकर उड़ रहा है.
  • पत्तियां हो रहीं बदरंग: मनसाही के पीड़ित किसान रमेश मंडल ने अपनी व्यथा सुनाते हुए बताया कि खेतों में पानी का स्तर न्यूनतम होने से जमीन के भीतर की मिट्टी अब दरकने लगी है. पानी की कमी और सीधे धूप पड़ने से मखाने की बड़ी पत्तियां झुलसकर पीली और काली पड़ रही हैं. यदि अगले दो से तीन दिनों के भीतर खेतों को पानी नहीं मिला, तो शत-प्रतिशत पौधे सूख जाएंगे.

रात-रात भर जाग रहे किसान; लो-वोल्टेज के कारण नहीं चल पा रहीं मोटरें

बिजली कटौती का दर्द: मखाना की खेती में सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह होता है कि इसके पत्तों और जड़ों को हमेशा पानी में डूबा रहना पड़ता है. पानी को मेंटेन करने के लिए किसान पूरी तरह बिजली संचालित पंप सेट (मोटर) पर निर्भर हैं. लेकिन भीषण गर्मी की शुरुआत होते ही मनसाही में बिजली की अघोषित कटौती शुरू हो गई है. किसान अपनी बारी के इंतजार में खेतों पर ही रात-रात भर जागकर गुजार रहे हैं, लेकिन जब बिजली आती भी है, तो उसका वोल्टेज इतना धीमा (Low Voltage) रहता है कि पानी खींचने वाली भारी मोटरें स्टार्ट ही नहीं हो पातीं. इस तकनीकी खामी से पटवन का पूरा शेड्यूल बिगड़ गया है.

फल आने की मुख्य अवस्था में पड़ा सूखा; ₹30 हजार प्रति बीघा की लागत दांव पर

  • घट जाएगा फलों का आकार: कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, यह समय मखाना की फसल में फल (गांठ) आने की सबसे संवेदनशील और मुख्य अवस्था है. इस मैच्योरिटी पीरियड में पानी की आंशिक कमी भी फलों के आकार को छोटा कर देती है, जिससे मखाने के दानों की क्वालिटी खराब हो जाती है और अंततः कुल पैदावार में भारी गिरावट आती है.
  • लागत डूबने का डर: क्षेत्र के एक अन्य किसान सुरेंद्र पासवान ने बताया कि उत्तम बीज, मजदूरी और खाद मिलाकर वे अब तक प्रति बीघा करीब 30 हजार रुपये की मोटी रकम खर्च कर चुके हैं. इस साल खुले बाजार में मखाने का थोक भाव काफी अच्छा और रिकॉर्ड स्तर पर है, लेकिन अगर बिजली और पानी के अभाव में फसल ही नहीं बची, तो किसानों की पूरी मेहनत और पूंजी जमींदोज हो जाएगी.

सिंचाई के लिए मिले निर्बाध बिजली; किसानों ने कृषि विभाग से लगाई गुहार

मनसाही प्रखंड के मखाना किसानों ने जिला प्रशासन, कृषि विभाग और नॉर्थ बिहार पावर डिस्ट्रिब्यूशन कंपनी (बिजली विभाग) के वरिष्ठ अधिकारियों से तत्काल हस्तक्षेप करने की सामूहिक गुहार लगाई है. किसानों की मुख्य मांग है कि मखाना बहुल खेती वाले फीडरों को चिह्नित कर कम से कम 6 से 8 घंटे की निर्बाध (बिना ट्रिपिंग के) और फुल-वोल्टेज बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए. किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते बिजली आपूर्ति में सुधार और सरकारी नलकूपों के माध्यम से सिंचाई के वैकल्पिक इंतजाम नहीं किए गए, तो क्षेत्र के हजारों किसान कर्ज के जाल में फंस जाएंगे, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पूरी तरह बदहाल हो जाएगी.

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