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जिस उपकरण को जनता की प्यास बुझाने के लिए स्थापित किया गया था, वह अब सिर्फ सरकारी उपेक्षा, अव्यवस्था और फंड की खुली बर्बादी की निशानी बनकर रह गया है.
उद्घाटन का ढोंग और दावों की हवा: एक साल में ही उखड़ गई सरकारी योजना की पोल
स्थानीय ग्रामीणों और फरियादियों का कहना है कि आज से लगभग एक साल पहले जब प्रखंड परिसर में इन वाटर कूलरों का उद्घाटन हुआ था, तब प्रशासनिक स्तर पर खूब वाहवाही लूटी गई थी. योजना यह थी कि रोजाना प्रखंड दफ्तर आने वाले हजारों लोगों, अधिकारियों, कर्मचारियों और दूर-दराज के ग्रामीणों को शुद्ध और ठंडा पेयजल आसानी से मिलेगा.
लेकिन देख-रेख के अभाव में यह महत्वाकांक्षी योजना चंद महीनों में ही पूरी तरह विफल साबित हो गई. वर्तमान स्थिति यह है कि न तो इसमें पानी की नियमित आपूर्ति की जा रही है और न ही इसका प्यूरीफायर सिस्टम कार्य कर रहा है.
खरीदने की जल्दबाजी लेकिन मेंटेनेंस से तौबा: जानिए क्यों रुकी पानी की बूंद
सरकारी योजनाओं में अक्सर देखा जाता है कि उपकरण खरीदने और बजट ठिकाने लगाने के नाम पर तो लाखों रुपये पानी की तरह बहा दिए जाते हैं, लेकिन उनके रखरखाव का कोई मजबूत रोडमैप नहीं बनाया जाता. आजमनगर प्रखंड परिसर में भी ठीक यही हुआ.
सोशल एक्टिविस्ट अजहर नजामी और जन सुराज के प्रखंड अध्यक्ष कलाम सहित अन्य लोगों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि जब से ये उपकरण लगाए गए हैं, उसके बाद से ही इनकी नियमित जांच और रखरखाव की कोई व्यवस्था नहीं की गई. अगर समय-समय पर इसकी मरम्मत और पानी की सप्लाई सुनिश्चित की जाती, तो आज यह दुर्दशा उत्पन्न नहीं होती.
प्यास से बेहाल फरियादी और उबलता जनाक्रोश: भीषण गर्मी में भटकने को मजबूर लोग
आजमनगर प्रखंड में हर दिन विभिन्न दूर-दराज की पंचायतों से सैकड़ों लोग अपने प्रशासनिक काम, प्रमाणपत्र बनवाने या फिर विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ लेने पहुंचते हैं. गर्मी के मौसम में यह समस्या और भी विकराल रूप ले लेती है जब घंटों परिसर में बैठे रहने के बाद लोगों को पीने का साफ पानी तक नसीब नहीं होता.
दूर-दराज से आने वाले लोगों को मजबूरन बाहर से पानी खरीदना पड़ता है या इधर-उधर भटकना पड़ता है. यह स्थिति न केवल योजना की विफलता को दर्शाती है, बल्कि सार्वजनिक धन के दुरुपयोग की ओर भी इशारा करती है. आक्रोशित आमजन की मांग है कि संबंधित विभाग और जिला परिषद इस ओर तुरंत ध्यान दे और खराब पड़े वाटर कूलर को अविलंब दुरुस्त कराए.
Katihar News: प्रशासनिक जवाबदेही पर उठे गंभीर सवाल
प्रखंड परिसर जैसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थल पर इस प्रकार की लापरवाही विभागीय अधिकारियों की घोर उदासीनता को बयां कर रही है. इस पूरे मामले पर आजमनगर के प्रखंड विकास अधिकारी (बीडीओ) सरोज कुमार से उनका पक्ष जानने के लिए दूरभाष पर संपर्क साधने की कोशिश की गई.
लेकिन संपर्क स्थापित नहीं होने के कारण इस खबर में उनका आधिकारिक पक्ष शामिल नहीं किया जा सका है. फिलहाल, ग्रामीण और सामाजिक कार्यकर्ता इस मामले को लेकर जल्द से जल्द कार्रवाई की उम्मीद लगाए बैठे हैं.

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