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पीरपैंती (भागलपुर). प्रखंड के परशुरामपुर पंचायत अंतर्गत अठनियां स्थित प्रसिद्ध विषहरी स्थान इन दिनों भक्ति, आस्था और कठिन साधना का केंद्र बना हुआ है. यहां 23 वर्षीय भगत मिथुन कुमार लगातार तीसरे वर्ष सीने पर कलश रखकर मौन व्रत के साथ मां दुर्गा की आराधना कर रहे हैं. किसान परिवार से आने वाले मिथुन की इस साधना को देखने और दर्शन करने के लिए दूर-दराज से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं. नवरात्र के दौरान उनकी कठिन साधना क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है.
लगातार तीसरे वर्ष सीने पर कलश रखकर कर रहे आराधना
मिथुन कुमार, अधिक मंडल के पुत्र हैं. साधारण किसान परिवार में पले-बढ़े मिथुन की मां दुर्गा के प्रति गहरी आस्था है. नवरात्र के नौ दिनों तक सीने पर कलश रखकर एक ही अवस्था में साधना करना उनके लिए शारीरिक रूप से कठिन है. इसके बावजूद वह दृढ़ इच्छाशक्ति और श्रद्धा के साथ अपनी साधना में लीन हैं.
मिथुन लगातार तीसरे वर्ष इस अनूठी साधना को कर रहे हैं. उनकी साधना को लेकर स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में उत्सुकता बनी हुई है.
नौ दिनों तक मौन व्रत, दिन में एक बार ग्रहण करते हैं तुलसी दल और गंगाजल
मिथुन की मां फूलो देवी ने बताया कि उनका बेटा नवरात्र के सभी नौ दिनों तक पूर्ण मौन व्रत रखता है. इस दौरान वह 24 घंटे में केवल एक बार थोड़ा तुलसी दल और गंगाजल ग्रहण करता है. उन्होंने बताया कि विजयादशमी की सुबह विधिवत अनुष्ठान संपन्न होने के बाद ही मिथुन का मौन व्रत टूटेगा. इसके बाद वह अन्न ग्रहण करेंगे. मां के प्रति उनकी अटूट आस्था और साधना के प्रति समर्पण परिवार के लिए भी विशेष महत्व रखता है.
दर्शन के लिए दूर-दराज से पहुंच रहे श्रद्धालु
नवरात्र शुरू होते ही अठनियां स्थित विषहरी स्थान में श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला बढ़ गया है. दूर-दराज के गांवों से लोग मिथुन की साधना देखने और मां के दर्शन करने पहुंच रहे हैं. मंदिर परिसर में धार्मिक आस्था का माहौल बना हुआ है. श्रद्धालु मिथुन की साधना को नजदीक से देखकर मां दुर्गा के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त कर रहे हैं.
मुखिया और समाजसेवी ने बताया समर्पण का उदाहरण
परशुरामपुर पंचायत के मुखिया पवन यादव और समाजसेवी विक्की कुमार ने मिथुन की साधना को आस्था और संयम का उदाहरण बताया. उन्होंने कहा कि आज के दौर में युवाओं के बीच भौतिक सुख-सुविधाओं का आकर्षण बढ़ रहा है. ऐसे समय में मिथुन की कठिन साधना लोगों को समर्पण और अनुशासन का संदेश देती है. उन्होंने कहा कि सच्ची भक्ति के लिए बड़े संसाधनों से अधिक श्रद्धा, संयम और समर्पण की आवश्यकता होती है. इस तरह के धार्मिक आयोजन क्षेत्र में सनातन संस्कृति और धार्मिक परंपराओं के प्रति लोगों की आस्था को भी सामने लाते हैं.
आस्था और साधना को लेकर क्षेत्र में चर्चा
अठनियां के विषहरी स्थान में मिथुन कुमार की साधना नवरात्र के दौरान श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है. लगातार तीसरे वर्ष सीने पर कलश रखकर मौन व्रत करना उनकी धार्मिक साधना की विशेष पहचान बन गया है. स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं के बीच उनकी आस्था और समर्पण को लेकर चर्चा हो रही है.
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