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Bihar Health Care Phc Exposed Days After Launch As Medicines Dumped And Emergency Services Fail – Bihar News

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बाढ़ अनुमंडल के राणाबीघा स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) के छह बेड वाले नए भवन का उद्घाटन दस दिन पहले किया गया था। उद्घाटन के दौरान विधायक और एसडीओ ने इसकी जमकर सराहना की थी, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग बताई जा रही है। इस स्वास्थ्य केंद्र पर कई पंचायतों और कई प्राथमिक उपस्वास्थ्य केंद्रों की जिम्मेदारी है। इसके बावजूद ग्रामीणों का आरोप है कि पीएचसी में डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी सुबह लगभग 11 बजे पहुंचते हैं और दोपहर दो से तीन बजे के बीच ही लौट जाते हैं।

दो कमरों वाले भवन में दवाओं का भंडारण कूड़े की तरह किया गया

ग्रामीणों का आरोप है कि पीएचसी में दवाओं के भंडारण में भी भारी अनियमितता है। पीएचसी से सटे दो कमरों वाले भवन में दवाओं का भंडारण कूड़े की तरह किया गया है। ग्रामीणों का दावा है कि तापमान नियंत्रित (कोल्ड-चेन) में रखी जाने वाली दवाएं भी खुले में रखी गई हैं। इसके अलावा, पीएचसी से सटे उच्च माध्यमिक विद्यालय के एक कमरे में भी पिछले डेढ़ वर्ष से अधिक समय से बड़ी मात्रा में दवाओं का भंडारण किया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि उस कमरे का ताला कभी नहीं खुलता और वहां रखी कई दवाएं एक्सपायर हो चुकी हैं।

नए भवन के उद्धाटन के बाद भी नहीं शुरू हो पाई इमरजेंसी सेवाएं

अब सवाल यह उठ रहा है कि जब पीएचसी में इतनी बड़ी मात्रा में दवाओं का भंडारण है, तो उनके रखरखाव और जरूरतमंद मरीजों तक समय पर दवाएं नहीं पहुंचने के कारण यदि दवाएं एक्सपायर हो जाती हैं, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी। ग्रामीणों का कहना है कि नए भवन के उद्घाटन के बाद भी पीएचसी में अभी तक आपातकालीन (इमरजेंसी) उपचार की सुविधा शुरू नहीं हो सकी है। ओपीडी के निर्धारित समय में भी डॉक्टरों के समय पर नहीं पहुंचने से लोगों को सर्दी, खांसी और सामान्य बीमारियों के इलाज के लिए भी अनुमंडलीय अस्पताल या निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता है।

ग्रामीणों ने लगाए गंभीर आरोप

राणाबीघा पीएचसी के अंतर्गत आने वाले नदावां गांव स्थित प्राथमिक उपस्वास्थ्य केंद्र को लेकर भी ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि केंद्र केवल रजिस्टर पर संचालित हो रहा है, जबकि एएनएम नियमित रूप से नहीं पहुंचती हैं। वहां तीन कार्टन एक्सपायर दवाएं रखी हुई हैं, लेकिन आवश्यक और उपयोगी दवाएं उपलब्ध नहीं हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि एएनएम दवाओं के वितरण और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी देने के लिए भी नियमित रूप से नहीं आती हैं। दूसरी ओर, राणाबीघा पीएचसी में दवाओं का भंडारण होने के बावजूद वे लोगों तक नहीं पहुंच पा रही हैं और अधिकारी केवल खानापूर्ति कर रहे हैं।

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मामले में अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई

ग्रामीणों ने यह भी बताया कि कुछ दिन पहले पीएचसी के पास सरकारी दवाओं को जलाने का मामला भी सामने आया था, जिसकी खबरें प्रकाशित हुई थीं। हालांकि, इस मामले में अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। पीएचसी सूत्रों का कहना है कि दवाओं के एक्सपायर होने के बाद उन्हें या तो जला दिया जाता है या सुरक्षित स्थान पर डंप कर दिया जाता है, जबकि रजिस्टर में दवाएं मरीजों तक पहुंचाने का उल्लेख किया जाता है।

वहीं, इस मामले को लेकर सिविल सर्जन डॉ. योगेंद्र प्रसाद मंडल ने बताया कि बहुत जल्द पीएचसी में इमरजेंसी सेवा शुरू कराई जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि दवाओं के भंडारण और उससे संबंधित शिकायतों की जांच कराई जाएगी।

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