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Bihar:सांसद की शिकायत पर हरकत में राजभवन, सबौर कृषि विश्वविद्यालय में नियुक्ति घोटाले के आरोप, साक्ष्य मांगे – Bihar: Raj Bhavan Seeks Evidence After Mp Alleges Recruitment Irregularities At Sabour Agricultural University

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बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर में कथित अवैध नियुक्तियों और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों ने अब राजभवन का ध्यान खींच लिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्यपाल सचिवालय ने शिकायत पर संज्ञान लेते हुए प्रारंभिक कार्रवाई शुरू कर दी है। इस घटनाक्रम के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन और शिक्षा जगत में हलचल तेज हो गई है।

राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव संजय कुमार द्वारा जारी पत्र में शिकायतकर्ता एवं बक्सर सांसद सुधाकर सिंह से आरोपों के समर्थन में आवश्यक दस्तावेज, साक्ष्य और निर्धारित प्रारूप में शपथ-पत्र उपलब्ध कराने को कहा गया है। राजभवन ने स्पष्ट किया है कि प्राप्त साक्ष्यों के आधार पर ही मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी।

350 से अधिक नियुक्तियों पर सवाल

सांसद सुधाकर सिंह ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि बिहार कृषि विश्वविद्यालय में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्तियों के दौरान बड़े पैमाने पर नियमों की अनदेखी की गई। शिकायत के अनुसार प्रशासनिक पदाधिकारी, सहायक कुलसचिव, विषय-वस्तु विशेषज्ञ, सहायक प्राध्यापक, निदेशक कार्य एवं संयंत्र समेत करीब 350 पदों पर नियुक्तियों में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। उन्होंने नियुक्ति प्रक्रिया में पक्षपात और नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

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CAG रिपोर्ट का भी हवाला

शिकायत में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट का भी उल्लेख किया गया है। सांसद का आरोप है कि रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों के बावजूद संबंधित मामलों में अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। इसी आधार पर उन्होंने राजभवन से हस्तक्षेप की मांग की थी।

15 दिन में मांगे साक्ष्य

राजभवन की ओर से जारी पत्र में बिहार सरकार के प्रचलित नियमों का हवाला देते हुए शिकायतकर्ता को 15 दिनों के भीतर आरोपों के समर्थन में साक्ष्य और लिखित आश्वासन प्रस्तुत करने को कहा गया है। इसके बाद ही मामले को अगले चरण की जांच प्रक्रिया में आगे बढ़ाया जाएगा।

प्रशासनिक हलकों में बढ़ी हलचल

राजभवन के संज्ञान लेने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन और संबंधित अधिकारियों के बीच हलचल तेज हो गई है। शिक्षा जगत से जुड़े जानकारों का मानना है कि यदि आरोपों की निष्पक्ष जांच होती है और शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो कई वर्तमान और पूर्व अधिकारियों की जवाबदेही तय हो सकती है।

वहीं राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि राजभवन की पहल के बाद यह मामला अब केवल विश्वविद्यालय प्रशासन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि राज्य की उच्च शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है। अब सभी की निगाहें सांसद सुधाकर सिंह द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले साक्ष्यों और राजभवन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं, जिससे पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकेगी।

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